दिन 8।
हरेक मंजिल तक का सफ़र 'एक आगाज' या कहे एक कदम से शुरू होता है चाहे वो अपनी लाइफ का ही पहला कदम क्यों न हो….. बात उस आगाज की है, जो अपने वर्तमान तक का सफ़र पूरा कर चुका है।
मई 2012।
नवमी कक्षा उत्तीर्ण कर पहली बार पढ़ने के लिए अपने घर से दूर जाने वाले थे। दूर, बहुत दूर नही सिर्फ 10 किमी। 10th की किताबें जोधपुर से चचेरे भाई से मंगवा ली। 10th कक्षा में 'हैप्पी पब्लिक स्कूल ' रानीवाड़ा में एडमिशन लिया गया। स्कूल से परिचित तो पहले से ही थे।
स्कूल के पहले दिन क्लास में सिर्फ 2 ही विद्यार्थी ही थे :-मैं और गौरव माहेश्वरी। पहली क्लास में अशोक जी राजपुरोहित सर् ने इंग्लिश पढ़ाई। गौरव से पहले कॉमर्स के हरिसिंहजी सर् से मुलाकात हुई। उनके इंट्रोडक्शन करने पर पता नही क्यों धमकियों का एहसाह हो रहा था। फिर मनोज जी सर् से मिलने के बाद अपनी क्लास में आ गये थे। मनोज जी सर फिजिक्स पढ़ाते थे उनसे पहले ही पहचान हो चुकी थी (via सुरेश चाचा)।
वो क्या है कि उस समय परीक्षा से पहले ही पढने वालो की श्रेणी में रहते थे तो किताबों से कम ही बतियाते थे। 2 दिन स्कूल जाने बाद ननिहाल चले गए। जब सुरेश चाचा को पता चला कि मैं ननिहाल चला गया तो उन्होंने डाँटा कि अगर ननिहाल जाना ही था तो किताबें इतनी जल्दी क्यों मंगवाई ? उस समयांतराल जून में वापस घर आ गया।
जुलाई के पहले सप्ताह में कक्षाओं के सेक्शन बन गए। मुझे A सेक्शन मिला। पहली बार साइंस को साइंस की तरह पढ़ा गया हिंदी या इतिहास की तरह नही।
साइंस राजेन्द्र जी सर् पढ़ाते थे। मैथ्स ,शायद 15 अगस्त तक उत्तमसिंह सर् ने पढ़ाया फिर उनका 2nd ग्रैड में चयन होने के बाद शंकर लाल जी सर् ने। संस्कृत बालकृष्णजी सर् पढ़ाते थे। शॉर्ट फॉर्म बालजी।
10th में दो subjects के टयूशन किये थे :- विज्ञान और अंग्रेजी। विज्ञान का ट्यूशन के लिए रमेशजी जीनगर सर् के पास जाते थे विज्ञान का ट्यूशन जॉइन करने का मकसद यह था कि कम समय में रिविशन हो जाए।
अंग्रेजी का ट्यूशन जरूरी था ऐसा मानते थे। अंग्रेजी का ट्यूशन अशोक जी सर् से पढ़ने राजपुरोहित हॉस्टल जाते थे। एक बार टयूशन में टेस्ट था, हम सब टाइम से पहले पहुंच गए थे तो ऐसे ही खेल रहे थे,तब राइटिंग वाले (लेफ्ट) हाथ मे चोट लग गयी। टेस्ट का पेपर तो आया लेकिन मैं कुछ लिख नही पाया। फिर अगला टेस्ट जब भी हुआ तब मुझे डबल टेस्ट देने पड़े। इस घटना से सीख ली कि लाइफ में ऐसी और भी घटनाएँ हो सकती हैं, तब से दूसरे हाथ से भी लिखना शुरू कर दिया। आज लगभग दोनों हाथो से लिख लेता हूं। लेकिन दोनो हाथो की राइटिंग एक सी नही है।
10th की मित्र मंडली में मयूर, कौशिक, प्रवीण राजपुरोहित, गौरव , कपिल, नरेश,वासु विश्नोई, उत्तम सुथार ,राकेश राजपुरोहित( उर्फ बासा- क्योंकि वो हर बात पर सलाह देता! ), दशरथ सिंह, गणपत, रज्जब ,...... ऐसे और बहुत से नाम है।
शाम को govt. स्कूल में क्रिकेट खेलने जाता था। एक दिन स्कूल में छुट्टी के टाइम क्लास में कोई टीचर नही था तो सब हुड़दंग कर रहे थे। तभी सुजान जी सर् क्लास में आ गये और सबको मुर्गा बनने का आदेश दे दिया। मैं इसका विरोध करता रहा कि मैं कोई हुड़दंग नही कर रहा था तो मैं पनिश क्यों हूँ? फिर उनसे पिटे गए और साथ मे मुर्गे भी बने। अगले दिन उनकी प्रिंसिपल सर् से शिकायत की तो उन्होंने बोला कि टीचर ही थे पिट दिया तो क्या हो गया। 'सुखी लकडी के साथ गीली लकड़ी भी जल जाती हैं' ।।।।
10th बोर्ड की परीक्षा हुई। इन्ही परीक्षाओं के समयांतराल में भी क्रिकेट खेलने से दूर नही रहे। इसका खामियाजा रिजल्ट्स ने चुकाया। रिजल्ट्स 69.67% और कक्षा में 3rd रैंक। उम्मीद से 5% कम।
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