रास्ते कभी ऊपर तो कभी नीचे,कभी समतल तो कहीं टूटे-फूटे,कहीं-कहीं तो बिल्कुल ही गायब ,पर हर छोटा बड़ा रास्ता कहीं-न-कहीं हमें लेकर जाता ही है। 12th के परिणाम आने के बाद फिर वही मीटिंग बनाई गयी कि अब आगे क्या करना है? JEE का एग्जाम दे दिया था, इंजीनियरिंग करने की कोई इच्छा नहीं थी, तो साल बर्बाद नही किया। अब तो सिर्फ़ बीएससी करनी है और UPSC की तैयारी करेंगें ऐसा सोच कर लाचू कॉलेज में बीएससी का आवेदन कर दिया । रानीवाड़ा में मुस्ताक अली के साइबर कैफे से फॉर्म भरा और अगले दिन जोधपुर चल दिए। 2 साल से जोधपुर रहने के बावजूद लाचू कॉलेज पहली बार देखा। उससे पहले सिर्फ नाम से ही जानते थे। कॉउंसलिंग के दिन यानि 30 जून 2015, को मैं और लक्सा लगभग 9 बजे कॉलेज आ गए। यहाँ आने पर पता चला कि काउंसलिंग 11 बजे के बाद शुरू होगी। हम भारतीयों की एक खासियत है कि हम कभी भी समय के पाबंद नही होते चाहे वो ट्रैन हो या आम इंसान। साढ़े 12 बज गए फिर भी काउन्सलिंग शुरू होने का कोई नाम ही नही। लगभग 12 बजे तक रितेश और उसके पापा भी आ गए। हमको तो भई बहुत जोर की भूख लग गयी फ़िर कॉलेज कैन्टीन की खोजबीन की गई, लेकिन बंद म...