...

 हमें सब कुछ बना बनाया मिल जाने के कारण हमनें अपनी सोचने की क्षमता खो दी हैं।

अध्यापक रटाने का प्रयत्न करते हैं, और बोर्ड की कॉपियां भी अध्यापक ऐसे जाँच करते है कि उनके विद्यालय की भी कॉपी किसी और के पास जाएगी या गयी होगी। वो सोचते है कि विद्यार्थियों के कम अंक आने के कारण  उन पर सरकार की ओर से कोई कार्यवाही भी हो सकती है।

सभी अपना अपना परिणाम अच्छा रखना चाहते हैं लेकिन दूसरे तरीके से।


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