दिन 6।
अब तीन की जगह 9 subject पढ़ने के लिए अगली क्लास 6th में आ गये। 6th में आते ही पर्यावरण अध्ययन का सामाजिक और विज्ञान में बंटवारा हो गया और साथ में उनके चार नए दोस्त संस्कृत, कला शिक्षा, S.U.P.W. और स्वास्थ्य शिक्षा को जोड़ा गया। संस्कृत, घर में आए मेहमान की तरह थी। थोड़ी ही समझ आती थी। किसी ने कहा था कि नकल करना गुनाह है, तो किसी ने कहा कि नकल करना गुनाह नही है नकल करते हुए पकड़े जाना गुनाह है। मैं दूसरे वाक्य को मानता था। जिंदगी में पहली बार नकल लेके गया। पूरी की पूरी संस्कृत। परीक्षा से पहले सिर्फ एक दोस्त को बताया था कि नकल लेके आया हूँ।। पता नही क्यों डर लगा कि आज गुनाह हो जाएगा (मतलब पकड़े जाएंगे)।। मन नही माना तो वो सभी पन्ने एक सुरक्षित जगह पर रख दिये ताकि घर जाते वक्त वापिस ले जा सके। परीक्षा में मेरी चेकिंग हुई , लेकिन पन्ने नही मिले।। गलतियों से भी कुछ सीखा जा सकता है। सुरेश चाचा 10th की पढ़ाई के लिए रानीवाड़ा चले गए।
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2003 क्रिकेट वर्ल्डकप, हमारे परिवार में मंझले दादा के घर नया T. V. लाया गया। पहली बार क्रिकेट मैच को देखा गया उससे पहले सिर्फ रेडियो पर कॉमेंट्री सुना करते थे। फिर अगले दिन अखबार में खेल पृष्ठ में पढ़ लेते थे। सुरेश चाचा को एक आदत थी कि इंडियन बैट्समैन की तस्वीरों को काट कर किताबो के पीछे चिपका देते थे।
इस समय मनोरंजन के लिए शक लक बूम बूम, सोनपरी, शक्तिमान दोपहर में आया करते थे, और 5 बजे के बाद श्री कृष्णा, रामायण, और महाभारत स्टार उत्सव चैनल पर देखा करते थे। जब इनके घर कोई tv नही देखता तो हम देखने से वंचित नही रहे इसलिए घर के पास ही ग्राम कृषि सहायक का क्वार्टर था तो उनके घर चले जाते थे। इसी टाइम दुकान पर बेठने के लिए दादा की आवाज आ जाती थी तो उसे अनसुना कर देता था।
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** जिस तरह किसी की कुछ अच्छाइयाँ और बहुत सारी बुराइयाँ होती है। मुझमे भी कुछ बुराई थी :- गुस्सा करना, खाना खाते time नाटक करना कि कुछ भी खाने में होता बस नही भाता, शाम को दुकान पर नहीं बैठना। दादा से अनाप-शनाप बहस करना ........॥
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