दिन 3।
जीवन के पहले इम्तिहान मुकम्मल हुए। इम्तिहान के नतीजे और कक्षा के स्थान में एक युद्ध-सा माहौल हो गया। नतीजों से ज्यादा, कक्षा में स्थान क्या रहा, को तवज्जो दिया गया। पहली कक्षा में प्रथम आये थे और प्रतिशत 65। इसी दरमियां कॉम्पिटिशन(उस समय टक्कर कहते थे ) से भी मुलाकात करली थी। इस कॉम्पिटिशन में मेरा प्रतिद्वंद्वी 'हैप्पी' था। हम केवल परीक्षा में ही प्रतिद्वंद्वी थे । परीक्षा से बाहर हम अच्छे वाले दोस्त हुआ करते थे। अच्छा मतलब, यदि हम में से कोई भी मोनिटर बनता तो दोनों को छोड़कर सब सर् से पिटे जाते।
इसी तरह दूसरी कक्षा मे भी प्रथम आया और प्रतिशत 68। इस बार एक नए शब्द से परिचित हुआ:- विशेष योग्यता। विशेष योग्यता गणित में आई थी।
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'जिस तरह परिवार एक प्राथमिक विद्यालय है उसी प्रकार स्कूल भी एक परिवार ही होता है।' स्कूल वाले परिवार में मुखिया श्री मसराराम जी थे। एक और सर् थे जिनसे बहुत प्रभावित हुआ :- श्री मोहनलालजी! हिंदी की वर्णमाला के सुधार में इनका बहुत योगदान हुआ करता था। जैसे मात्रात्मक गलतियां, हैंडराइटिंग आदि।
जिस तरह किसी फ़िल्म में एक विलेन का किरदार होता है उसी तरह यहाँ भी विलेन के किरदारों को माना था, जिसे हम बहुत पीटने वाले सर् की संज्ञा देते थे। आज के बचपन वालो ने ऐसी संज्ञा से शायद ही परिचय किया हो। नाम :- भरत जोशी और आसुराम वाघेला।
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अब तीन की जगह चार विषयों को पढ़ने की ओर अग्रसर हुए मतलब कक्षा तृतीय। हिंदी,गणित और अंग्रेजी के परिवार में एक नए subject पर्यावरण अध्ययन को जोड़ा गया जिसमे हम थोड़ा सामाजिक और थोड़ा विज्ञान से अवगत होते थे। विज्ञान भी एक तरह का सामाजिक था, कैसे? क्योंकि हम इसे सामाजिक की तरह ही पढ़ा करते थे।
कक्षा तीन की परीक्षाएं हुई, नतीजे भी आए। इस बार के नतीजे पहले की तुलना से अलग आए। कक्षा में 2nd आए थे लेकिन प्रतिशत 77। जिस तरह असेम्बली इलेक्शन में 1 वोट कम होने से M.L.A. नही बन पाते है उसी तरह 1 नम्बर कम आने से 1st की पोजीशन भी नही मिली। इस बार 1ST हैप्पी आया था।
इन नतीजों ने मेरे 4th क्लास के नतीजें निर्धारित किये थे। जब 4th के result सुनाए गए तो सबसे पहले मेरा नाम लिया गया । कक्षा के साथ-साथ स्कूल में भी 1ST आया था और प्रतिशत भी अपने चरम पर थे: 84.3%।
वो कहते हैं न कि अभिमान, प्रगति में रूकावट कर देते हैं। 5th के नतीजों ने इसे साबित भी कर दिया । 3rd position आयी थी और प्रतिशत पता नही…. ! 3rd position आने के गम में उस मार्कशीट को ढंग से देखा भी नहीं। आज वो किस हालात में यह भी नही पता। शायद घर पर सुरक्षित हो। 1st आने वाले से तो परिचित था(हैप्पी), लेकिन 2nd कोई नया था:-अर्जुन। अर्जुन के आने के बाद स्कूल में महाभारत के मुख्य किरदार पाँचों पांडव पूरे हो गए थे :- युधिष्ठर सिंह, भीम (चचेरा भाई), सहदेव,अर्जुन,नकुल।
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