दिन 4।
जिस तरह हर सिक्के के दो पहलू HEAD -TAIL, और दिन -रात होते हैं ,उसी तरह कुछ अच्छा -बुरा भी होता हैं।। बुरी खबर से अवगत, शायद मैं उस समय 2nd क्लास में होऊंगा: एक दिन स्कूल से घर आते ही मम्मी ने कहा कि नाना बा नहीं रहे....... उस समय इन शब्दों के मतलब को नही जानता था; मम्मी ने पूछा कि क्या तू ननिहाल आना चाहेगा। मैंने क्या जवाब दिया नही पता.. बस इतना पता है कि उस टाइम मैं ननिहाल गया था । शोकाकुल की वे आवाजे आज भी कभी-कभी कानों को दस्तक देती हैं.......।
अंतिम संस्कार होने के बाद वापस घर आने की जल्दी थी.... क्योंकि मन मे एक डर था कि अगले दिन स्कूल नही जाने के कारण, जब भी स्कूल जाएंगे तो पीटे जाएंगे। उन विलेन वाले किरदारों के कारण मन मे इस प्रकार के डर ने घर बना लिया था। हम रात को 2 बजे के आस-पास घर आ गये थे । इस समय का याद रहने का कारण वो डर ही था। 'जब कभी सुबह होते ही कहीं जाना हो तो चाँदनी रात भी भोर वाले सूर्य तरह लगती हैं।' ...... अगले दिन स्कूल चले गए और पिटे नहीं गए।
*******
**
दुनिया मे ऐसी शक्तियां भी होती है जिसके कारण कभी- कभी strange घटनायें होती है। ....परदादी का देहांत :- देहांत से एक दिन पहले शाम को खाना खाने के बाद दादा जैसे ही बाहर आँगन में जाने लगे तो परदादी ने उनसे कहा: आज मेरे पास थोड़ा बैठ जा। हालांकि परदादी कभी खुद नही बुलाती थी। दादा उनके पास बैठे, बात-वात की। फिर अगले दिन अलसुबह मेरे जीवन की दूसरी दुखद खबर सुनी। उस दिन परिवार से लगभग 50 वर्ष के बाद कोई अर्थी उठी थी। इस परिवार का सिर्फ एक पौधा अपने तीन डालों के साथ कब एक वट वृक्ष बन गया, पता ही नही चला। .....22 january। उस साल का Republic day हमारे परिवार में से किसी ने नही मनाया....
****
***
खेल जगत।
"जिस तरह जिंदगी में पढ़ाई अपना हिस्सा रखती हैं उसी तरह खेल भी उतना ही अपना हिस्सा रखते है।" बचपन में वो सब खेल खेलें जो खेलना सीखा था। जैसे:-गिलिडण्डा, ढ़ेरी-ढ़ेरी, लुका-छिपी, खो-खो, लंगड़ी-टाँग, लूण-मिर्च -हल्दी-धाणा ,सतोलियो, वाघ-बकरी, सोलह सारी, साथी-बदल इत्यादि।
लेकिन 'क्रिकेट' खेलना सबसे रूचिकर लगता था। क्रिकेट की ऐसी दीवानगी थी कि खाना नही मिले चलेगा लेकिन क्रिकेट जरूर खेलेंगे। क्रिकेट खेलने की रूचि शायद सुरेश चाचा और ताऊजी के बड़े लड़के महिपाल भाई के साथ खेलने से होई होगी। यह वो दौर था जब सचिन,सहवाग, द्रविड़ ,गांगुली, मो. कैफ, युवराज, अजित आगरकर, अनिल कुंबले, हरभजनसिंह, रिक्की पोटिंग ,मैथ्यू हैडन, एडम गिलक्रिस्ट, एंड्रयू सायमंड्स, हर्षल गिब्ब्स , जैक कालिस, इंजमाम -उल-हक, सलमान बट,शोएब अख्तर शाहिद अफरीदी जैसी हस्तियों की दीवानगी हुआ करती थी। जब सरकारी स्कूल में खेलने जाते थे तो सुरेश चाचा को इंजमाम-उल-हक़ की उपाधि दी हुई थी, क्योंकि उनका शरीर इंजमाम से मिलता जुलता था। इसी बात से आज वो पी. टी.आई सर् भी याद हो गए जिनसे कुछ ज्यादा ही लगाव था।........वो हमें govt. स्कूल से खेल सामग्री दे देते थे। वो वॉलीबॉल खेला करते थे। उनसे जुड़ी याद सिर्फ इतनी है कि वे मुझे क्रिकेट में अंपायर बना देते थे।......
.....
****.
Comments
Post a Comment