दिन 9
जब 10th का परिणाम आया उस समय ननिहाल था। कुछ दिनों बाद घर आ गया। सुरेश चाचा और उनके मित्र मंडली(प्रवीण जी, विशालजी ,लक्ष्मणजी ....) के साथ रिजल्ट्स की समीक्षा की गई। अब तक सिर्फ एक ही रास्ते पर यात्रा कर रहे थे।अब diversion का समय आ गया।समीक्षा के समय मुझे भी विचार रखने का मौका मिला। मुझे हरेक ऑप्शन के साथ रास्ते में पड़ने वाले मोड के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी गयी। मैंने अपने 9th में लिए गए निर्णय को रखा जिससे आर्ट्स और कॉमर्स के रास्ता स्वत: ही बंद हो गए। अब science maths/bio के options में से किसी एक को चुनना था। हालांकि मेरे परिवार से 2 लोग पहले से ही maths में पढ़ चुके थे। सुरेश चाचा और महिपाल भाई। उनके results से मुझे थोड़ा डर भी लगा की जो मैंने चुना है वो सही हैं भी या नही। मुझे मेरी मैथ्स के प्रति रुचि ने bio चुनने को मना कर दिया। आगे क्या पढ़ने के निर्णय के बाद, कहाँ पढ़ना है ,उसका चुनाव करना था। इस चुनाव का निर्णय कैसे हुआ वो तो नही पता ,लेकिन जिनका भी रहा उनका ज़िंदगी भर शुक्रगुजार रहूँगा। "उसी दिन शाम को सुरेश च...